POEM (तेरा संघर्स )
क्या मिला तुझको क्यों खबर रखता है तू
जो दिया मैंने तुझको संभाल ले
क्यों फ़िक्र करता है तू
ये युग कल भी तेरा था , आज भी और कल भी तेरा रहेगा -क्यों फ़िक्र करता है तू -
चाँद लम्हो के समंदर में डूब के तू देख ले
तैरना खुद ही सीख ही सीख जायेगा एक पहल कर के देख ले-
आँधिया चलती रहेगी देख मत तु , कागजो की कस्तिया यु फेक न तू।,इस झा को फिर से देख तू -
कल सबेरा फिर से होगा ,फिर से आएगी शाम
जो बीत गया अफ़सोस क्यों -जो छूट गए अफ़सोस क्यों
मै चला ,चलता चला था वक्त के इस ख्वाब में ,मुढ़ न फिर देख तू
कल किसी ने क्या देखा ,आज फिर से देख तू
कर्म के इस चक्र में अडिग अकेला फिर निकल तू -
बेसब्र की इन आँधियो में सब्र फिर न तोड़ तू
फिर मिलेंगे ,मिलते रहेंगे कर्म की इस कर्म भूमि में -
इन चंद लम्हो की तरह फिर मिट सकने वाला नहीं तू
फिर इंतजार किसका इस ज्वर के सैलाब में -
बन सुनामी पारकर तू ,हर के भी जीत तू ,
छोङ गया ये दो पल गमो के।
हम तो पंछी धरा वाले ,आसमा का भी सीना चीर गया तू
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