की मुझे पसंद नहीं तेरा गवारा होना......
* कि मुझे पसंद नहीं तेरा गवारा होने।,
वफाये हर रोज तरसती है मुझसे मिलने के लिए !
बही थी हजार नौकाएं इस मझधार में ,
तरसते है हजार किनारे मुझसे मिलने के लिए !!
कहते है यु हसरते गुजर जाती है उनके इंतजार में ,
हमें नहीं गवारा होना उन हसरतो के लिए !!!
* बुझी हुईं आग भी जल सकती है ,
तूफ़ान से नाव भी निकल सकती है !
हो के उदास न बदल अपने इरादे को,
तेरे इरादों से दुनिया बदल सकती है !!
नफरतो की आग जो उसने लगाई थी इस दिल में
तरस गए थे बदल इस धरती पर बरसने के लिए
ये शाम सुबह की तरह बहुत सुहानी होती है जनाब
फिर क्यों तरस गए थे बादल इस धरती पर बरसने
फिर क्यों तरस गए थे दिल दोबारा उनसे मिलने के लिये
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